स्वच्छता एक नई शुरुआत | 07 | Shayaribegum

        

Poem आंसूओं की चादर.....

Poem  अपनी असली शक्ल देखकर चिढ़ जाते हैं..

Poem  हर शख्स की नियत बदल रही है... 

Poem  उन पर पागल होने के इल्जाम होते हैं..

Poem  काश मेरे पंखों को नहीं  जकड़ती ये जात-ए- लड़की की हथकड़ियां....

              मदद...




 एक बार की बात है ।एक बिल्ली थी ।उसका नाम था रानी। रानी बहुत अमीर थी और इसी बात का उसे घमंड था। वह किसी की मदद नहीं करती थी ।

एक दिन स्कूल में मीना ने रानी से कहा :रानी मैं पेन घर पर ही भूल गई हूं और मेरे पास पैसे भी नहीं है ।आज मेरा इम्तिहान है। मुझे कुछ घंटों के लिए पेन दे दो ।
रानी के पास दो पेन थे लेकिन फिर भी उसने कहा: नहीं !मैं नहीं दूंगी ।मीना को बहुत दुख हुआ परंतु रानी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा।
 एक दिन रानी के घर पर उत्सव था। इसीलिए वह बड़ी देर रात को सोई थी। सुबह देर से उठी और जल्दी-जल्दी में जैसे तैसे तैयार होकर स्कूल पहुंची। जब रानी ने पढ़ाई के लिए अपना बस्ता खोला ,तब उसने देखा कि वह अपने पेन तो घर पर ही भूल गई है । उसका घर भी दूर है और उसे छोड़ने वाला ड्राइवर पर चला गया है ।
तब वह सब से पेन मांगने लगी परंतु उसकी आदतों से वाकिफ़ उसके किसी दोस्त ने उसे पेन  नहीं दिया। 
तब मीना ने उसे कहा : मुझे अभी  पेन का काम नहीं है। तुम चाहो तो  मेरा पेन ले सकती हो। क्योंकि रानी पहली बार इतना परेशान हुई ।इसीलिए उसे अपनी गलती समझ आ गई ।अब वह हमेशा दूसरों की मदद करती थी ।

शिक्षा ...
हमें हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए।

                                         📜 वैष्णवी शर्मा




स्वच्छता... एक शुरूआत




1 दिन की बात है। एक राजू नाम का आदमी केला खा रहा था। उसने केले का छिलका सड़क पर फेंक दिया।तभी वहां पर एक और आदमी आ गया।उसका नाम गोलू था।गोलू  ने उससे कहा भाई यह केले के छिलके को कूड़ेदान में फेंक दो। 

 राजू: क्यों मैं क्यों ? फेकू अगर तुम्हें इतनी  स्वच्छता ही आ रही है तो  खुद  क्यों नहीं उठा लेते।

 बस इतना कह कर वहां से चला गया।

 गोलू ने छिलके को कूड़ेदान में फेंक दिया।

 दूसरे दिन भी राजू  ने कचरा सड़क पर फेंक दिया।
 तभी वहां से कविता नाम की औरत  गुजर रही थी। 
उसने देखा कि यह आदमी ने सड़क पर कचरा फेंक दिया। कविता वही रुक गई और उसने कहा ओए !आदमी हम कभी भी सड़क पर कचरा नहीं फेखते  हैं ।
और तुम क्यों फेंक रहे हो।
 इस कचरे को अभी कूड़ेदान में फेंक दो।

 राजू ने कहा:  मैं क्या तुम्हारा नौकर हूं। 
अगर तुम्हें इतनी स्वच्छता आ रही है ।
तो खुद उठा कर फेंक दो।

  कविता ने उत्तर दिया:  मेरा क्या जाता है।
बीमार  तो तुम ही पढ़ोगे।
 और वहां से चली गई।
राजू ने सोचा: अगर मैं बीमार पड़ गया ।
तो मेरी पत्नी और बच्चों का क्या होगा।
इतना सब सोचकर उसने कचरा उठाकर कूड़ेदान में फेंक दिया।

 शिक्षा: हमें हमेशा कचरा कूड़ेदान में ही फेंकना चाहिए। 

                                                💐जैनस्वी शर्मा

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